Mounts on the Palm in hindi. सभी पर्वतो की जानकारी।

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Mounts on the Palm in hindi. सभी पर्वतो की जानकारी।

परिचय


परिचय  करतल का निरिक्षण करते समय उसपर अवस्थित पर्वतों का विशेष महत्व है| क्योंकि पर्वतों की उन्नति, अवनति तथा उनपर विद्यमान रेखाओं के माध्यम से ही ज्योतिषी जातक के भुत-भविष्य और वर्तमान का ज्ञान प्राप्त करता है| हथेली पर स्थित पर्वतों के नाम ग्रहों के नाम पर ही आधारित हैं| अतः जिस ग्रह में जो गुण विद्यमान होते हैं, वे ही गुण उस पर्वत में भी उपस्थित होते हैं| आश्चर्यजनक बात यह है कि जातक की कुण्डली में जो ग्रह उच्च या बलवान होते हैं वे ग्रह हथेली में भी उन्नत दशा में दृष्टिगोचर होते हैं| हस्तरेखा-विज्ञान में सभी ग्रहों (पर्वतों) का स्थान निर्धारित है| जिनका परिचय क्रमशः

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मंगल पर्वत  

मंगल पर्वत   मंगल पर्वत के दो स्थान हैं। पहला स्थान जीवन रेखा के ऊपरी स्थान के नीचे एवं दूसरा इसके विपरीत हृदय रेखा एवं मस्तिष्क रेखा के बीच में स्थित है। पहला स्थान शारीरिक अवस्था तथा दूसरा स्थान मानसिक अवस्था का द्योतक है। साहस, बल एवं शक्ति आदि का आकलन प्रथम पर्वत से होता है। यदि मंगल का प्रथम क्षेत्र सुंदर एवं उन्नत हो तो व्यक्ति सेना में या इसी प्रकार के उच्च पद पर आसीन होता है। वह एक सफल अधिकारी सिद्ध होता है। दूसरे पर्वत से व्यक्ति के धैर्य, शौर्य, संयम, क्षमा आदि गुणों का पाता चलता है। पहला पर्वत शारीरिक क्षमता एवं दूसरा पर्वत मानसिक क्षमताओं को दर्शाता है। विकसित मंगल पर्वत वाले व्यक्तिओं के व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली होता है। ये लोग जल्दबाजी में निर्णय लेने और आक्रामक स्वभाव वाले होते हैं। मंगल ग्रह अगर विकसित हो तो लोग अक्सर आर्मी या सशस्त्र बल के साथ जुड़े होते हैं। ऐसे लोग अपने उद्देश्यों के प्रति दृढ़ संकल्प रहते हैं। इनका सबसे बड़ा दोष इनमें आवेग और आत्म नियंत्रण की कमी है। ऐसे व्यक्तियों को आत्म -नियंत्रण का अभ्यास करना चाहिए और सभी प्रकार की मदिरा और उत्तेजक पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यदि मंगल पर्वत अधिक विकसित है तो व्यक्ति मे मंगल संबंधित विशेषताएं बढ़ती हैं। ऐसे लोग अत्यंत शक्तिशाली बन जाते हैं और अपनी शक्ति के द्वारा वह कमजोरों का शोषण करते हैं। अक्सर ऐसे लोग समाज विरोधी गतिविधियों जैसे चोरी, डकैती, लूट आदि मे शामिल होकर अत्यंत क्रूर बन जाते हैं। कम विकसित मंगल पर्वत व्यक्ति को कायर बनाता है। लेकिन वह बहादुर होने का दावा करता है। जब अवसर की मांग और समय आता है, तो वह अपने कदम वापस ले लेता है।

शुक्र पर्वत

शुक्र पर्वत   शुक्र पर्वत समान्यतः उच्च गुणों का बोधक है। इससे स्वास्थय, सौन्दर्य,प्रेम,दया,सहानुभूति आदि मनोभावों का ज्ञान होता है। इस पर्वत का अत्यधिक उन्नत होने पर व्यक्ति विलासी, कमी और व्यभिचारी भी हो सकता है। हथेली पर अंगूठे के आधार पर स्थित पर्वत, शुक्र पर्वत कहलाता है। यह अनुग्रह, आकर्षण, वासना और सौंदर्य की उपस्थिति या अनुपस्थिति को दर्शाता है। यह प्रेम और साहचर्य की इच्छा और सौंदर्य की हर रूप में पूजा करने को भी दर्शाता है। अति विकसित शुक्र पर्वत लोगों को सुन्दर और विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित करता है। मित्रों का साथ इन्हें बहुत पसंद होता है। अच्छा कपड़ों एवं अच्छा खाने के शौकीन होते हैं। स्वभाव से स्पष्टवादी होते हैं। पूर्ण विकसित शुक्र पर्वत चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी बनाता है ऐसे व्यक्ति विपरीत सेक्स के बीच लोकप्रिय होते हैं। ये लोग जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं लेकिन जब यह किसी से प्यार करते हैं तो उनके प्रति पूर्णतः समर्पित होते हैं। हाथ पर अति विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति में इंद्रिय सुख की इच्छा प्रबल कर देता है। ऐसे लोग प्रेम संबंधों में स्वार्थी होते हैं और सदैव शारीरिक सुख की इच्छा रखते हैं। इसके विपरीत कम विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति को सुस्त एवं कठोर बनाता है। सौन्दर्य एवं भौतिकता के प्रति इनमे कम आकर्षण होता है।

गुरु पर्वत

गुरु पर्वत   तर्जनी उंगली के मूल भाग के नीचे गुरु पर्वत स्थित होता है| यह स्वभावतः नेतृत्व, लेखन, धर्मशास्त्र एवं अधिकार का देवता है| जिनकी हथेली में गुरु पर्वत सर्वाधिक उन्नत दशा में होता है, उनमे देवत्व की प्रधानता होती है| ऐसे व्यक्ति स्वाभिमानी, विद्वान, न्यायाधीश, परोपकारी, वचनपालक एवं सम्मानित होते हैं| देश के उच्चपदासीन, न्यायाधीश, नेता, राष्ट्रभक्त एवं धर्म गुरुओं के करतल में गुरुपर्वत विकसित दशा में होता है| यदि इस पर्वत का झुकाव शनि पर्वत की ओर होता है तो जातक चिन्तनशील एवं एकान्तप्रिय हो जाता है| यदि गुरु पर्वत धंसा हुआ हो तो जीवन में आत्मसम्मान की न्यूनता, माता-पिता के सुख में कमी एवं निम्नस्तरीय मित्रों से संपर्क होता है| गुरु पर्वत अप्रत्यासित रूप से उन्नत हो तो व्यक्ति स्वेच्छाकारी, अभिमानी एवं स्वार्थपरायण होता है।

बुध पर्वत

बुध पर्वत   कनिष्ठा अँगुली के मूल भाग के नीचे जो उन्नत स्थान होता है वह बुधपर्वत कहलाता है| यदि यह भाग समुन्नत दिखाई दे तो जातक प्रत्येक कार्य में सफलता अर्जित करता है| ऐसा वयक्ति अत्यंत बिद्धिमान, भविष्य द्रष्टा एवं सुनियोजित कार्य करने वाला होता है|यदि यह पर्वत असामान्य रूप से अत्यधिक उन्नत प्रतीत हो तो जातक चालाक, मक्कार, और धूर्त होता है| बुध पर्वत पर वर्ग की आकृति बनी हो तो वह प्राणी अवैधानिक कार्यों में संलिप्त एवं समाज विरोधी कार्यों में संलग्न रहता है| करतल में बुध पर्वत अविकसित होने पर व्यक्ति आजीवन दरिद्र रहता है| जबकि सामान्य रूप से विकसित बुध पर्वत जातक को आविष्कार एवं वैज्ञानिक कार्यों में प्रवीण बनाता है| श्रेष्ठ अभिनेता, वक्ता, वकील, व्यापारी, लेखक एवं वैज्ञानिक आदि के हाथ में बुध पर्वत सुन्दर एवं समुन्नत दशा में होता है|

शनि पर्वत

शनि पर्वत   शनि पर्वत मध्यमा उंगली के मूल भाग के नीचे तथा गुरु पर्वत के बगल में स्थित होता है| यदि यह पर्वत सुन्दर या पूर्ण विकसित होता है तो व्यक्ति प्रबल भाग्यशाली होता है तथा अपने जीवन में सभी उपलब्धियों को स्वप्रयत्न से हासिल करता है| ऐसा व्यक्ति एकान्तप्रिय, रहस्यवादी एवं चिन्तनशील होता है| शनि प्रधान, व्यक्ति जादूगर, वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री, तांत्रिक, इंजीनियर, साहित्यकार एवं गुप्तविधाओं के ज्ञाता होते हैं| शनि पर्वत का अप्रत्यासित विकास होने पर जातक ठग, डाकू और लुटेरा होता है| ऐसा व्यक्ति आत्महत्या भी कर लेता है| यदि करतल में शनि पर्वत का अभाव हो तो व्यक्ति महत्वहीन और भाग्यवादी होता है| तथा जीवन असफलताओं का सामना करता है|

चन्द्र पर्वत

चन्द्र पर्वत   चन्द्र पर्वत हाथ में बुध पर्वत के नीचे चन्द्र पर्वत स्थित होता है। चन्द्र पर्वत पूर्णतः उन्नत होने पर व्यक्ति बहुत गुणवान एवं कल्पनाशील होते हैं। कल्पना के द्वारा ही वे अपनी प्रतिभा को नई दिशा देते हैं। ये लोग संगीत, काव्य, वस्तु, ललितकला आदि मे प्रवीण होते हैं। ऐसे लोग विपरीत परिस्थिति को भी अनुकूल बनाने का सामर्थ्य रखते हैं। पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को कला प्रेमी बनाता है। ऐसे लोग कलाकार, संगीतकार, लेखक बनते हैं। ऐसे व्यक्ति मजबूत कल्पनाशक्ति के गुणी होते हैं। यह लोग अति रुमानी होते हैं लेकिन अपनी इच्छाओं के प्रति आदर्शवादी होते हैं। शुक्र पर्वत की तरह इनमें भावुकता या कामुकता वाला स्वभाव नहीं होता है। पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को भावनाओं में बहने वाला और किसी को उदास न देखने वाला होता है। प्रायः यह लोग वास्तविकता से परे कल्पना प्रधान और अच्छे लेखक और कलाकार होते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसे लोग उन्मादी और तर्कहीन व्यवहार करते हैं। इसके अतिरिक्त ये निर्णय लेने में अधिक समय लेने वाले और अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं। अति विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को आलसी और सनकी बनाता है। ऐसे व्यक्ति कल्पना से पूर्ण और वास्तविकता से दूर रहते हैं। कभी कभी, यह एक हल्के रूप में विकसित हो कर एक प्रकार का पागलपन भी हो सकता है। यदि चंद्र पर्वत अविकसित है, तो व्यक्ति मे अच्छी कल्पना का अभाव, दूरदर्शिता का अभाव, नए और रचनात्मक विचारों का अभाव रहता है, यह लोग क्रूर और स्वार्थी होते हैं।

सूर्य पर्वत

सूर्य पर्वत   अनामिका उंगली के मूल भाग के नीचे सूर्य पर्वत स्थित होता है| यदि यह पर्वत सुन्दर एवं सुविकसित होता है तो जातक असाधारण प्रतिभाशाली एवं यशस्वी होता है| ऐसा व्यक्ति जीवन में सफलता के उच्च मानदण्ड स्थापित करता है| सफल कलाकार, संगीतकार, चित्रकार, गायक, अभिनेता, व्यापारी, राजनेता ऐसे ही व्यक्ति होते हैं| इनका जीवन वैभवपूर्ण होता है| ये व्यापार में बहुत ही सफल होते हैं| इनके पास अनेक आय के स्रोत होते हैं| इनके जीवन में अनेकशः आकस्मिक धनप्राप्ति होती है| ये लोग जन्मजात प्रतिभा सम्पन्न होते हैं| यदि यह पर्वत अविकसित होता है तो जातक मूर्ख होता है| सौंदर्यप्रेमी एवं असफल होता है| आवश्यकता से अधिक सुर्यपर्वत का विकास होने पर व्यक्ति अत्यधिक अहंकारी एवं मिथ्या प्रशंसा करने वाला होता है| साथ ही झगडालू तथा व्यर्थ में धन अपव्यय करने वाला होता है|

राहु पर्वत

राहुपर्वत  चन्द्र पर्वत, मंगल एवं शुक्र पर्वत से घिरा हुआ भाग राहु पर्वत कहलाता है| यदि यह भाग उन्नत दशा में हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही भाग्यवान होता है| ऐसा व्यक्ति प्रतिभा सम्पन्न, धार्मिक, सुखी, परोपकारी, पैतृकसम्पत्ति का भोग करने वाला होता है| यदि यह पर्वत अल्प विकसित होता है तो प्राणी चंचल प्रकृति का होता है तथा अपने ही हाथों अपनी धन-सम्पत्ति का सर्वनाश कर देता है।

केतु पर्वत

केतुपर्वत   यह पर्वत मणिबन्ध के ऊपर शुक्र तथा चन्द्रपर्वत के मध्य में अवस्थित होता है| यदि यह पर्वत धँसा हुआ होता है तो प्राणी में काम-शक्ति का अभाव होता है| ऐसा व्यक्ति संतानहीन होता है| यदि यह पर्वत उन्नत एवं पुष्ट होता है तो जातक अत्यन्त भाग्यशाली होता है| वह अपने पौरुष से जीवन में समस्त उपलब्धियों को हस्तगत करता है तथा सभी क्षेत्रों में सफलता अर्जित करता है| यह पर्वत अस्वाभाविक रूप से उठा हुआ हो तो बाल्यकाल में बहुत कष्ट भोगना पड़ता है| साथ ही शिक्षा प्राप्ति के लिए भी अत्यन्त संघर्ष करना पड़ता है| साथ ही घर की आर्थिक स्थिति अत्यन्त दुर्बल होती जाती है| करतल में कितनी ही सुन्दर भाग्यरेखा और सूर्यरेखा क्यों न हो यदि तत्सम्ब्ध ग्रह पर्वत का सुन्दर, समुचित विकास नहीं होता है तो ये रेखाएं अपना पूर्ण फल कदापि नहीं दे सकतीं| वस्तुतः किसी भी जातक के जीवन की उपलब्धियों और सफलताओं में ग्रह पर्वत एवं रेखाओं का संतुलित योगदान होता है| हस्तरेखाएं तो काल प्रभाव से परिवर्तित होती रहती है परन्तु करतल में अवस्थित ग्रह पर्वत अपने मूल स्वरुप में ही रहते हैं, जिसका फल जातक को सामान्य रूप से आजीवन प्राप्त होता है|
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